महासमुंद। बंगाल की खाड़ी से उठा भीषण चक्रवात अर्नब 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकराया और देखते ही देखते तटीय इलाकों में तबाही का मंजर छोड़ गया। 115 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं और मूसलाधार बारिश ने आंध्र प्रदेश के कई जिलों में बिजली, सड़क, फसल और जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। तूफान 29 अक्टूबर तक कमजोर होकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा की ओर बढ़ गया है, लेकिन इसके अवशेष से अभी भी भारी बारिश का खतरा बना हुआ है।
कितनी हुई तबाही और कितने लोगों की मौत?
मौतों का आंकड़ा: रॉयटर्स की 29 अक्टूबर की रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से कम-से-कम 6 मौतों की पुष्टि की गई है। वहीं, The New Indian Express ने 7 मौतों की रिपोर्ट दी है। इसलिए अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ा अलग है।
मौतों की वजह: बिजली के टूटे तारों की चपेट में आना, पेड़ गिरना और बिजली के खंभे गिरने जैसी घटनाएँ।
तेज हवाएँ: तट से टकराते समय हवा की रफ्तार लगभग 115–135 किमी प्रति घंटा थी, जबकि कुछ झोंके 150 किमी प्रति घंटा तक पहुँचे।
फसलों को नुकसान: शुरुआती रिपोर्टों में आंध्र प्रदेश के लगभग 2.2 लाख हेक्टेयर कृषि एवं बागवानी क्षेत्र के प्रभावित होने का अनुमान है।
चक्रवात कहाँ टकराया और इसका रास्ता क्या रहा?
चक्रवात अर्नब ने 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश के नरसापुर के आसपास तट को पार किया। इसकी लैंडफॉल प्रक्रिया लगभग सुबह 2 बजे से 8 बजे तक चली। उस समय इसकी हवाओं की रफ्तार 115–135 किमी प्रति घंटा थी और कुछ झोंके 150 किमी प्रति घंटा तक पहुँच रहे थे। तट पार करने के बाद यह कमजोर होकर जमीन के अंदर बढ़ा।
किन इलाकों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा?
आंध्र प्रदेश के कई तटीय जिलों में नुकसान की खबरें सामने आईं: विशाखापत्तनम में बिजली के तार टूटने और करंट लगने की घटनाएँ। काकीनाडा में तेज हवाओं से पेड़ और बिजली के खंभे गिरे। पश्चिम गोदावरी में लगभग 4,000 पेड़ उखड़ने और सड़कें अवरुद्ध होने की सूचना। एलुरु में निचले इलाकों में पानी भरने से आवागमन प्रभावित हुआ। कोनसीमा में नारियल के पेड़ों और अन्य फसलों को नुकसान पहुँचा। इन क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य चलाए गए। आंध्र प्रदेश में कम-से-कम 15,000 बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त होने की सूचना दी गई। इसके कारण कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई।
ओडिशा में बाढ़ का खतरा क्यों बढ़ा?
चक्रवात कमजोर होने के बाद भी भारी बारिश जारी रहने से दक्षिणी ओडिशा में बाढ़ की चिंता बढ़ गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने गंजाम, गजपति, कोरापुट, नबरंगपुर, मलकानगिरी और रायगढ़ा के लिए रेड अलर्ट जारी किया था। लगातार बारिश से नदियों में अचानक बाढ़, निचले इलाकों में जलभराव, भूस्खलन और खड़ी फसलों को नुकसान होने का खतरा पैदा हुआ।
छत्तीसगढ़ में चक्रवात का क्या असर है?
IMD के बुलेटिन के अनुसार, 29 अक्टूबर सुबह 8:30 बजे के आसपास यह सिस्टम जगदलपुर से लगभग 40 किलोमीटर उत्तर-उत्तर-पश्चिम में था। इसके आगे उत्तर की ओर बढ़ने और कमजोर होकर निम्न दबाव क्षेत्र में बदलने की संभावना जताई गई थी। दक्षिण छत्तीसगढ़, ओडिशा और आसपास के क्षेत्रों में बारिश का असर जारी रह सकता है।
क्या सावधानी रखें?
तेज बारिश या गरज-चमक के दौरान सुरक्षित जगह पर रहें। टूटे बिजली के तारों से दूर रहें। नदियों, नालों और जलभराव वाले रास्तों को पार न करें। किसानों को खेतों में पानी भरने और फसल गिरने की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए। चक्रवात के आने से पहले आंध्र प्रदेश और ओडिशा में मिलाकर 1.8 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया।








