एसआईआर के नाम पर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना बंद करे विपक्ष
महासमुंद। भारतीय जनता पार्टी ओबीसी मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राकेश चंद्राकर ने चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर बड़ा हमला बोला है। श्री चंद्राकर ने कहा कि देश को अस्थिर करने का असफल प्रयास कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों द्वारा किया जा रहा है। सरकार का विरोध करने के लिए विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए आवश्यक प्रक्रिया एसआईआर को मुद्दा बनाकर देश की संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश हो रही है।
श्री चंद्राकर ने कहा कि चुनाव आयोग स्पष्ट कर चुका है कि एसआईआर से जुड़े सभी निर्णय आयोग के तीनों सदस्यों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। इसका आदेश सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक साथ लागू किया गया है। इसके बावजूद राहुल गांधी सहित कांग्रेस के नेता बिना किसी प्रमाण के आयोग की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं और जनता में भ्रम फैला रहे हैं। यह लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ है। अगर कांग्रेस के पास कोई प्रमाण है तो उसे सार्वजनिक करे, अन्यथा राहुल गांधी देश से माफी मांगें और नेता प्रतिपक्ष के पद से इस्तीफा दें।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की विश्वसनीयता ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। एसआईआर सामान्य पुनरीक्षण से अलग एक गहन सत्यापन है जिसमें यह देखा जाता है कि मतदाता जीवित है, अपने पते पर सामान्य रूप से निवास कर रहा है और उसका नाम एक से अधिक स्थान पर तो नहीं है। इसका कानूनी आधार संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 21(3) है। सर्वोच्च न्यायालय भी आयोग के इस अधिकार को बरकरार रख चुका है। तेजी से शहरीकरण, पलायन और नामों के दोहराव के कारण समय-समय पर ऐसी जांच जरूरी हो जाती है।
श्री चंद्राकर ने कहा कि आयोग ने शुद्धता के साथ समावेशिता का पूरा ध्यान रखा है। 20 राज्यों में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और शेष 12 राज्यों में तीसरा चरण चल रहा है। यदि किसी मतदाता को नोटिस मिलता है तो बूथ लेवल अधिकारी स्वयं घर जाकर दस्तावेज लेकर ईसीआई नेट पर अपलोड कर रहे हैं ताकि किसी को कार्यालय के चक्कर न काटने पड़ें। मजदूरों, रैन बसेरों में रहने वाले और गरीब वर्ग के लिए विशेष शिविर लगाए गए हैं। पूरे देश में लाखों बीएलए और स्वयंसेवक बुजुर्गों और दिव्यांगों की मदद के लिए लगे हैं और चुनाव के दिन शत प्रतिशत वेबकास्टिंग की व्यवस्था है। ड्राफ्ट सूची से नाम हटना मताधिकार छीनना नहीं है, वहीं इसी अवधि में 2.37 करोड़ नए युवा मतदाताओं को जोड़ा जाना समावेशिता का प्रमाण है।
उन्होंने एक गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि सीजेपी जैसे संगठन भी उन्हीं राज्यों में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं जहां भाजपा या उसके सहयोगी दलों की सरकार है। कांग्रेस या अन्य सहयोगी दलों की सरकार वाले राज्यों में सीजेपी का कोई आंदोलन या धरना नहीं होना भी सवालों के घेरे में है। इससे स्पष्ट होता है कि यह एक सोची समझी रणनीति के तहत संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास है जिसे देश की जनता समझ चुकी है।
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By CGKOSAL NEWS
On: October 18, 2026 3:31 PM
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