हर साल भाजपा सरकार की उदासीनता से धान खरीदी होती है प्रभावित
महासमुंद। प्रदेश में 15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने जा रही है, लेकिन महासमुंद सहित पूरे छत्तीसगढ़ के हजारों किसान इस बार अपनी उपज बेचने से वंचित हो सकते हैं। इसका कारण पटवारियों की हड़ताल और एग्रीस्टेक पंजीयन में अटकी प्रक्रिया है। पूर्व संसदीय सचिव और महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने इसे सरकार की उदासीनता और किसानों के खिलाफ साजिश करार देते हुए तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
श्री चंद्राकर ने कहा कि धान बेचने के लिए 31 अक्टूबर तक एग्रीस्टेक पंजीयन की तिथि निर्धारित थी। लेकिन पटवारियों के हड़ताल के चलते सैकड़ों किसानों के रकबा और खसरा में त्रुटि सुधार नहीं हो पाया। किसी की जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी है तो किसी का खसरा सत्यापन अटका हुआ है। फार्मर आईडी बनवाने के लिए जमीन से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन कराना होता है और इसके लिए खसरा रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी का सही होना जरूरी है। पटवारियों की हड़ताल के कारण दस्तावेजों की जांच और रिकॉर्ड में सुधार नहीं हो सका, जिसका सीधा असर एग्रीस्टेक पंजीयन पर पड़ा है।
उन्होंने कहा कि एक तरफ पटवारी अपनी जायज मांगों को लेकर 20 दिन से अधिक समय से हड़ताल पर हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार उनसे बात कर समाधान निकालने का प्रयास तक नहीं कर रही है। उल्टे पटवारियों को निलंबित करने और शो कॉज नोटिस थमाने जैसी तानाशाही कार्रवाई की जा रही है। सरकार चाहती तो पटवारियों से सकारात्मक संवाद कर आंदोलन खत्म करा सकती थी, लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार चाहती ही नहीं कि पटवारी काम पर लौटें और धान खरीदी सुचारू रूप से संचालित हो। पूर्व विधायक ने कहा कि धान खरीदी में अब केवल 9 दिन शेष हैं, लेकिन समितियों में किसी प्रकार की तैयारी नहीं हो पाई है। कई समितियों के कर्मचारियों को वेतन भुगतान नहीं किया गया है, जिसके चलते वे समितियों में तालाबंदी कर वेतन की मांग कर रहे हैं। ऐसे में समय पर सभी किसानों से धान खरीदी हो पाना असंभव नजर आ रहा है। किसानों को चिंता है कि वे समय पर अपनी धान की उपज कैसे बेच पाएंगे।
पूर्व संसदीय सचिव ने आरोप लगाया कि पिछले तीन खरीदी सीजन से भाजपा सरकार धान खरीदी में ढुलमुल रवैया अपना रही है। हर बार किसी न किसी बहाने धान खरीदी को प्रभावित कर किसानों को धान बेचने से वंचित करने की साजिश रची जा रही है। कभी पंजीयन की जटिल प्रक्रिया, कभी पोर्टल की गड़बड़ी और अब पटवारियों के हड़ताल। उन्होंने मांग की है कि सरकार तत्काल पटवारियों से बात कर हड़ताल खत्म कराए, एग्रीस्टेक पंजीयन की तिथि बढ़ाए और जिन किसानों का पंजीयन त्रुटि सुधार के अभाव में नहीं हो पाया है, उनके लिए विशेष शिविर लगाकर पंजीयन सुनिश्चित करे, ताकि एक भी किसान धान बेचने से वंचित न रहे।







