महासमुंद। किसानों को आपसी विवाद में उलझाकर धान बेचने से वंचित करने की बड़ी साजिश भाजपा की साय सरकार रच रही है। यह आरोप कांग्रेस के प्रदेश संयुक्त महासचिव व जीव जंतु कल्याण बोर्ड छत्तीसगढ़ शासन के उपाध्यक्ष आलोक चंद्राकर ने लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार के नए प्रयोगों से किसानों का भारी नुकसान होने वाला है और हजारों किसान धान विक्रय से वंचित हो सकते हैं।
श्री चंद्राकर ने कहा कि सरकार ने फसल प्रविष्टि को पटवारी आईडी से हटा दिया है और अब कृषि विभाग के माध्यम से डिजिटल क्रॉप सर्वे और पीवी ऐप के माध्यम से फसल सत्यापन कराया जा रहा है। इन दोनों ही व्यवस्थाओं में गंभीर खामियां हैं। जो मैप प्राइवेट सर्वेयरों को दिया गया है उसमें मौके और मैप के बीच 9 से 10 मीटर तक का अंतर है, जिससे गलत खेत में गलत फसल की प्रविष्टि होने की पूरी संभावना है। एक बार गलत प्रविष्टि हो गई तो वह स्थायी रूप से दर्ज हो जाएगी और भविष्य में भूमि विवाद का बड़ा कारण बनेगी।
उन्होंने कहा कि गांव के केवल 50 से 60 प्रतिशत खसरे ही डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए उपलब्ध कराए गए हैं, कई गांवों के तो एक भी खसरे उपलब्ध नहीं हैं। जिन खसरों की उपलब्धता नहीं है वहां फसल प्रविष्टि ही नहीं होगी और बिना फसल प्रविष्टि के किसान अपना धान नहीं बेच पाएगा। जो खसरे डीसीएस से छूट गए हैं, उनके लिए पीवी ऐप लाया गया है जिसमें हर खेत के चार कोनों का फोटो और जियो लोकेशन दर्ज करना अनिवार्य किया गया है। बिना किसान की उपस्थिति और बिना सीमा मिलान के यह तय करना असंभव है कि कौन सा खेत किसका है। जियो लोकेशन से खेत को स्थायी रूप से चिन्हित कर दिया जाएगा, बाद में यदि आपसी बंटवारा, मेड़ विवाद या कब्जे की स्थिति बनी तो किसान कहां जाएगा।
श्री चंद्राकर ने कहा कि सरकार जल्दबाजी में बिना जमीन मिलान के एक ही स्थान पर बैठकर सभी खसरों का पीवी कराने का दबाव बना रही है। यह सीधे तौर पर किसानों की भूमि के साथ खिलवाड़ है। जब यह कार्य कृषि विभाग का है तो राजस्व अमले पर कार्रवाई की धमकी देकर क्यों करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह पूरी योजना किसानों को उलझाने और धान खरीदी से वंचित करने की सुनियोजित साजिश है। सरकार को चाहिए कि इस प्रयोग को बंद कर पूर्व की तरह गिरदावरी की व्यवस्था बहाल करे ताकि किसानों का धान समय पर बिक सके और गांव में शांति बनी रहे।ये पूरी प्रकिया अन्नदाता किसानों को परेशान करने के लिये बनाया गया है और ये भाजपा के किसान विरोधी मानसिकता को 100% प्रमाणित करता हैं !!
किसानों को आपसी विवाद में उलझाकर धान बेचने से वंचित करने की साजिश रच रही साय सरकार: आलोक चंद्राकर








