अपनी ही जमीन पर बाउंड्रीवॉल बनाने से लेकर घर पर हमले तक के आरोप, एक साल पुरानी शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने का दावा
महासमुंद। पटेवा थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत सिंधौरी के आश्रित ग्राम नवापारा में एक परिवार ने सामाजिक बहिष्कार, घर पर हमले और अपनी ही जमीन पर निर्माण रोकने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि पिछले पांच से छह माह से उन्हें गांव में अलग-थलग किया जा रहा है और हुक्का-पानी बंद कर दिया गया है। परिवार ने अब कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पीड़ित भुवनेश्वर निर्मलकर पिता स्वर्गीय बुधुराम निर्मलकर के अनुसार नवापारा में उनके नाम पर कुल आठ खसरा नंबर की 1.3900 हेक्टेयर भूमि दर्ज है। खसरा नंबर 433 में उनका मकान बना है। उनका कहना है कि मकान की सुरक्षा के लिए वे अपनी जमीन पर बाउंड्रीवॉल बनवा रहे थे, जिससे किसी का रास्ता या सुखाचार प्रभावित नहीं हो रहा था। इसके बावजूद गांव के कुछ लोगों ने निर्माण कार्य बलपूर्वक रुकवा दिया। इस दौरान गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।
परिवार का दावा है कि इस संबंध में करीब एक साल पहले 2 दिसंबर 2025 को कलेक्टर के जनदर्शन में शिकायत दी गई थी, जिसका पंजीयन क्रमांक सुरक्षा नंबर 848 बताया गया है। लेकिन उस शिकायत पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परिवार का सवाल है कि जब शिकायत जिला प्रशासन के सामने रखी जा चुकी थी तो जांच क्या हुई और मौके का निरीक्षण हुआ या नहीं।
ताजा विवाद 25 अक्टूबर 2026 की घटना से जुड़ा है। भुवनेश्वर निर्मलकर के अनुसार उस दिन गांव के कुछ लोग उनके घर पहुंचे और विवाद करने लगे। शिकायत में घर की बाउंड्रीवॉल तोड़ने, ईंट-पत्थर फेंकने, मारपीट और जान से मारने की धमकी का आरोप लगाया गया है। परिवार का कहना है कि डर के कारण घर के सदस्यों को भीतर छिपना पड़ा। इसी दौरान रायपुर निवासी मोहम्मद हामिद खान ने मौके पर पहुंचकर बीच-बचाव किया, जिससे स्थिति संभली। परिवार ने घटना की सूचना डायल 112 और थाना पटेवा को दी।
परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि उनकी सड़क किनारे स्थित कृषि भूमि खसरा नंबर 913, 914, 915 और 947 में मवेशी छोड़कर फसल को नुकसान पहुंचाया गया। 26 अक्टूबर की सुबह खेत में पहुंचकर उन्होंने क्षतिग्रस्त फसल की तस्वीरें लीं। उनका कहना है कि थाना प्रभारी ने नायब तहसीलदार झलप के साथ मौके पर निरीक्षण का आश्वासन दिया था, लेकिन निर्धारित समय पर निरीक्षण नहीं हुआ।
इस विवाद का एक और पहलू शासकीय भूमि के पट्टे और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़ा है। परिवार ने कलेक्टर न्यायालय में दिए आवेदन में खसरा नंबर 429/2, 236/2 तथा वर्ष 1983-84 के पुराने अभिलेखों में दर्ज खसरा नंबर 120/1 और 132/2 का उल्लेख किया है। आवेदन में पुराने रिकॉर्ड में ग्राम कोटवार मानिकराम के नाम की प्रविष्टि और वर्तमान रिकॉर्ड में रुक्मणी बाई का नाम दर्ज होने की बात कही गई है। आरोप है कि पद का दुरुपयोग कर शासकीय भूमि का पट्टा अपने और वारिसों के नाम पर बनवाया गया। यह मामला भी जांच का विषय है।
लगातार विवाद और असुरक्षा से परेशान परिवार ने अब आत्मदाह की चेतावनी दी है। ग्राम पंचायत सिंधौरी के सरपंच रामप्रकाश बंजारे ने कहा है कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए, जो हुआ वह गलत हुआ है। अब पूरे जिले की नजर कलेक्टर और एसपी की कार्रवाई पर है कि जनदर्शन की पुरानी शिकायत, सामाजिक बहिष्कार के आरोप, घर पर हमले और फसल नुकसान की शिकायतों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।








